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Hindi vyakaran

वर्ण विचार (Phonology)

उच्चारण और वर्तनी (Pronunciation & Spelling)

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शुद्ध बोलना उच्चारण है और शुद्ध लिखना वर्तनी। दोनों की सामान्य अशुद्धियाँ और उनके नियम।

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इस पृष्ठ में

एक ही शब्द को गलत बोलना और गलत लिखना — ये दो अलग भूलें हैं, और दोनों के कारण भी अलग हैं।

उच्चारण का संबंध ध्वनि से है: वर्ण मुख के किस भाग से निकल रहा है। वर्तनी का संबंध लेखन से है: शब्द में कौन-सा वर्ण, कौन-सी मात्रा, किस क्रम में आएगी। देवनागरी में दोनों बहुत निकट हैं, क्योंकि यहाँ प्रायः जैसा बोला जाता है वैसा ही लिखा जाता है — पर “प्रायः” ही समस्या है।

उच्चारण स्थान

हर वर्ण मुख के एक निश्चित भाग से निकलता है। वही उसका उच्चारण स्थान है, और देवनागरी वर्णमाला का क्रम इसी पर आधारित है।

स्थानवर्णनाम
कंठअ, आ, क वर्ग, ह, विसर्गकंठ्य
तालुइ, ई, च वर्ग, य, शतालव्य
मूर्धाऋ, ट वर्ग, र, षमूर्धन्य
दंतत वर्ग, ल, सदंत्य
ओष्ठउ, ऊ, प वर्गओष्ठ्य
नासिकाङ, ञ, ण, न, म, अनुस्वारनासिक्य
कंठ-तालुए, ऐकंठतालव्य
कंठ-ओष्ठओ, औकंठोष्ठ्य
दंत-ओष्ठदंतोष्ठ्य

उच्चारण की सामान्य अशुद्धियाँ

बोलचाल में ये भेद प्रायः मिट जाते हैं, पर लिखने में ये अर्थ बदल देते हैं।

अशुद्धशुद्धकिस बात का ध्यान
छमाक्षमाक्ष का उच्चारण
परसादप्रसादर की मात्रा
इस्कूलस्कूलआरंभ में अनावश्यक इ
सक्तिशक्तिश और स का भेद
बिसबीसह्रस्व-दीर्घ का भेद
ग्यानज्ञानज्ञ का उच्चारण
रिषिऋषिऋ का उच्चारण
ब्रम्हाब्रह्माह्म का क्रम

वर्तनी के प्रमुख नियम

1. अनुस्वार और अनुनासिक

यह वर्तनी की सबसे बड़ी उलझन है, पर नियम सीधा है।

अनुस्वार (ं) पूरा व्यंजन है — पंचम वर्ण का स्थान लेता है और स्पष्ट सुनाई देता है। अनुनासिक (ँ) केवल स्वर को नासिका से बोलने का चिह्न है।

अनुस्वारअनुनासिक
गंगा, अंडा, चंचलचाँद, हँसना, आँख
संबंध, कंबल, पंखगाँव, दाँत, साँप

अर्थ बदल जाता है

हंस — एक पक्षी।

हँस — हँसने की क्रिया।

चिह्न का यह अंतर वर्तनी की भूल नहीं, अर्थ की भूल है।

2. पंचमाक्षर का नियम

जब किसी वर्ग का पंचम वर्ण (ङ, ञ, ण, न, म) उसी वर्ग के किसी व्यंजन से पहले आए, तो उसके स्थान पर अनुस्वार लिखा जा सकता है।

पंचमाक्षर सहितअनुस्वार सहित
अङ्कअंक
चञ्चलचंचल
खण्डखंड
सन्देहसंदेह
कम्बलकंबल

3. ह्रस्व और दीर्घ का भेद

अशुद्धशुद्ध
दिवालीदीवाली
आशिर्वादआशीर्वाद
प्रतिक्षाप्रतीक्षा
सुर्यसूर्य
कवि की पत्निकवि की पत्नी

4. र के तीन रूप

रूपनियमउदाहरण
रेफ ( र्)र् के बाद स्वर-सहित व्यंजन आए तो ऊपर लगेगाकर्म, धर्म, सूर्य
पदेन ( ्र)व्यंजन के बाद र् आए तो नीचे लगेगाप्रकार, क्रम, ग्राम
ट्र वाला रूपट वर्ग के साथराष्ट्र, ट्रेन

ध्यान से देखिए

कर्म — यहाँ र् पहले है, बाद में। इसलिए रेफ ऊपर।

क्रम — यहाँ क् पहले है, बाद में। इसलिए नीचे।

एक ही दो वर्ण, पर क्रम बदलते ही चिह्न और शब्द दोनों बदल गए।

प्रायः अशुद्ध लिखे जाने वाले शब्द

अशुद्धशुद्धअशुद्धशुद्ध
अनाधिकारअनधिकारउपरोक्तउपर्युक्त
अत्याधिकअत्यधिककवियत्रीकवयित्री
अहिल्याअहल्यागृहणीगृहिणी
आर्शीवादआशीर्वादज्येष्टज्येष्ठ
इकठ्ठाइकट्ठातत्वतत्त्व
उज्वलउज्ज्वलनिरोगनीरोग
पूज्यनीयपूजनीयपरिक्षापरीक्षा
महत्वमहत्त्वलछमीलक्ष्मी
वापिसवापसविद्यार्थीयोंविद्यार्थियों
शताब्दिशताब्दीसन्यासीसंन्यासी
सामग्रिसामग्रीश्रोतस्रोत

अभ्यास

उत्तर देखने से पहले स्वयं सोचें।

  1. उच्चारण और वर्तनी में क्या अंतर है?

    उत्तरउच्चारण का संबंध ध्वनि से है — वर्ण मुख के किस भाग से निकलता है। वर्तनी का संबंध लेखन से है — शब्द में कौन-सा वर्ण और कौन-सी मात्रा किस क्रम में आएगी।

  2. अनुस्वार और अनुनासिक में अंतर उदाहरण सहित बताइए।

    उत्तरअनुस्वार (ं) पूरा व्यंजन है, पंचम वर्ण का स्थान लेता है और स्पष्ट सुनाई देता है — गंगा, अंडा। अनुनासिक (ँ) केवल स्वर को नासिका से बोलने का चिह्न है — चाँद, हँसना। “हंस” पक्षी है और “हँस” क्रिया — चिह्न बदलते ही अर्थ बदल जाता है।

  3. पंचमाक्षर का नियम क्या है? दो उदाहरण दीजिए।

    उत्तरजब किसी वर्ग का पंचम वर्ण (ङ, ञ, ण, न, म) उसी वर्ग के व्यंजन से पहले आए, तो उसके स्थान पर अनुस्वार लिखा जा सकता है — अङ्क = अंक, सन्देह = संदेह। आधुनिक मानक हिंदी में अनुस्वार वाला रूप ही प्रचलित है।

  4. “कर्म” और “क्रम” में र के चिह्न का अंतर समझाइए।

    उत्तरकर्म में र् पहले और म बाद में है, इसलिए रेफ ( र्) ऊपर लगेगा। क्रम में क् पहले और र बाद में है, इसलिए र पदेन रूप में नीचे लगेगा। वर्णों का क्रम बदलते ही चिह्न और शब्द दोनों बदल जाते हैं।

  5. शुद्ध रूप लिखिए — आर्शीवाद, कवियत्री, उपरोक्त, इकठ्ठा, महत्व।

    उत्तरआशीर्वाद, कवयित्री, उपर्युक्त, इकट्ठा, महत्त्व।

सम्बंधित विषय

Type the name in Devanagari or Roman — e.g. संज्ञा या sangya

हिंदी और रोमन — दोनों में खोजा जा सकता है।