शब्द भंडार (Vocabulary)
अनेकार्थी शब्द (Polysemous Words)
Download PDFएक ही शब्द जब प्रसंग के अनुसार अनेक अर्थ दे, तो उसे अनेकार्थी कहते हैं। अर्थ शब्द से नहीं, वाक्य से तय होता है।
इस पृष्ठ में
पर्यायवाची में अनेक शब्द, एक अर्थ होता है। अनेकार्थी उसका ठीक उल्टा है — एक शब्द, अनेक अर्थ।
कनक का अर्थ सोना भी है और धतूरा भी। कौन-सा अर्थ लिया जाए, यह शब्द नहीं बताता — यह वाक्य बताता है।
प्रमुख अनेकार्थी शब्द
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| कनक | सोना, धतूरा, गेहूँ |
| हरि | विष्णु, इंद्र, सिंह, सूर्य, सर्प, बंदर |
| अर्क | सूर्य, मदार का पौधा, रस |
| अंबर | आकाश, वस्त्र |
| कर | हाथ, किरण, टैक्स |
| काल | समय, मृत्यु, यमराज, अकाल |
| गुरु | शिक्षक, भारी, बृहस्पति, बड़ा |
| घन | बादल, हथौड़ा, घना |
| जलज | कमल, मोती, मछली, शंख |
| तीर | बाण, किनारा |
| पत्र | पत्ता, चिट्ठी, पंख |
| पद | पैर, ओहदा, कविता का चरण, व्याकरण का पद |
| फल | फल, परिणाम, लाभ, चाकू की धार |
| मधु | शहद, वसंत, मदिरा |
| वर्ण | अक्षर, रंग, जाति |
| हार | पराजय, माला |
| नग | पर्वत, रत्न, वृक्ष |
| मान | सम्मान, अभिमान, नाप |
| अक्ष | धुरी, पासा, आँख |
| श्री | लक्ष्मी, शोभा, संपत्ति, आदरसूचक उपाधि |
| सारंग | मोर, हिरण, बादल, सर्प, कोयल, कमल |
| उत्तर | जवाब, एक दिशा, बाद का |
अर्थ वाक्य से तय होता है
वाक्य में
राजा ने प्रजा पर भारी कर लगाया। — यहाँ कर = टैक्स।
सूर्य की कर धरती पर पड़ीं। — यहाँ कर = किरण।
उसने अपने कर जोड़ लिए। — यहाँ कर = हाथ।
इसीलिए अनेकार्थी शब्दों का अभ्यास केवल सूची रटकर नहीं होता। हर अर्थ का एक वाक्य बनाइए — तभी अर्थ स्मृति में टिकेगा।
अनेकार्थी और श्रुतिसम भिन्नार्थक में अंतर
ये दोनों प्रायः गड्डमड्ड कर दिए जाते हैं, जबकि भेद स्पष्ट है।
| आधार | अनेकार्थी | श्रुतिसम भिन्नार्थक |
|---|---|---|
| शब्द | एक ही शब्द | दो अलग शब्द |
| वर्तनी | वही रहती है | थोड़ी बदलती है |
| उदाहरण | कर = हाथ / किरण / टैक्स | कुल = वंश, कूल = किनारा |
एक ही शब्द, अलग व्याकरणिक कोटि
कई अनेकार्थी शब्दों में अर्थ के साथ शब्द-भेद भी बदल जाता है।
| शब्द | संज्ञा के रूप में | विशेषण के रूप में |
|---|---|---|
| गुरु | शिक्षक | भारी, बड़ा |
| घन | बादल | घना |
| सोना | स्वर्ण | — (क्रिया: निद्रा लेना) |
वाक्य में
उसका बस्ता बहुत गुरु है। — विशेषण, अर्थ भारी।
गुरु का स्थान माता-पिता के समान है। — संज्ञा, अर्थ शिक्षक।
अभ्यास
-
अनेकार्थी और पर्यायवाची में मूल अंतर क्या है?
उत्तरपर्यायवाची में अनेक शब्द होते हैं और अर्थ एक होता है। अनेकार्थी में शब्द एक होता है और अर्थ अनेक।
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“हरि” के चार अर्थ लिखिए।
उत्तरविष्णु, इंद्र, सिंह और सूर्य (सर्प तथा बंदर भी)।
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अनेकार्थी शब्द और श्लेष अलंकार में क्या संबंध है?
उत्तरश्लेष तभी संभव है जब शब्द अनेकार्थी हो, पर हर अनेकार्थी प्रयोग श्लेष नहीं होता। श्लेष तब बनता है जब एक ही प्रयोग से एक साथ कई अर्थ निकलें, जैसे “रहिमन पानी राखिए” में पानी के तीन अर्थ।
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“कुल” और “कूल” अनेकार्थी क्यों नहीं हैं?
उत्तरक्योंकि इनकी वर्तनी भिन्न है — ये दो अलग शब्द हैं, एक शब्द के दो अर्थ नहीं। ऐसे युग्म श्रुतिसम भिन्नार्थक कहलाते हैं।
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“उसका बस्ता बहुत गुरु है” — यहाँ “गुरु” का अर्थ और शब्द-भेद बताइए।
उत्तरअर्थ है “भारी” और यहाँ यह विशेषण है। संज्ञा के रूप में इसी शब्द का अर्थ शिक्षक होता है।