शब्द विचार (Morphology)
वाच्य (Voice)
Download PDFक्रिया का वह रूप जिससे पता चले कि वाक्य में कर्ता प्रधान है, कर्म प्रधान है या भाव — उसे वाच्य कहते हैं।
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राम पत्र लिखता है और राम से पत्र लिखा जाता है — बात एक ही है, पर पहले वाक्य में ध्यान राम पर है और दूसरे में पत्र पर। वाक्य में किसे प्रधान बनाया गया है, यह क्रिया के रूप से पता चलता है। इसी को वाच्य कहते हैं।
वाच्य के भेद
1. कर्तृवाच्य
जिस वाक्य में कर्ता प्रधान हो और क्रिया कर्ता के लिंग-वचन के अनुसार चले, वह कर्तृवाच्य है।
वाक्य में
राम पुस्तक पढ़ता है।
सीता पुस्तक पढ़ती है।
कर्ता बदला तो क्रिया बदली — पढ़ता से पढ़ती। कर्म पुस्तक वही रहा। अतः यह कर्तृवाच्य है।
कर्तृवाच्य में क्रिया सकर्मक और अकर्मक दोनों हो सकती है।
उदाहरण
- राम आता है।
- राम पत्र लिखता है।
2. कर्मवाच्य
जिस वाक्य में कर्म प्रधान हो और क्रिया कर्म के लिंग-वचन के अनुसार चले, वह कर्मवाच्य है। कर्ता गौण हो जाता है और उसके साथ प्रायः से या के द्वारा लगता है।
वाक्य में
राम से पत्र लिखा जाता है।
राम से पुस्तक पढ़ी जाती है।
यहाँ कर्ता राम दोनों बार वही है, पर कर्म बदलते ही क्रिया बदल गई — लिखा जाता से पढ़ी जाती।
3. भाववाच्य
जिस वाक्य में न कर्ता प्रधान हो न कर्म, बल्कि क्रिया का भाव प्रधान हो, वह भाववाच्य है। क्रिया सदा अन्य पुरुष, पुल्लिंग, एकवचन में रहती है।
वाक्य में
मुझसे चला नहीं जाता।
राम से बैठा नहीं जाता।
सीता से बैठा नहीं जाता।
कर्ता पुल्लिंग हो या स्त्रीलिंग, क्रिया जाता ही रहती है — यही भाववाच्य की पहचान है।
भाववाच्य अकर्मक क्रियाओं से बनता है और प्रायः असमर्थता या निषेध के अर्थ में आता है।
तीनों का अंतर
| आधार | कर्तृवाच्य | कर्मवाच्य | भाववाच्य |
|---|---|---|---|
| प्रधान | कर्ता | कर्म | भाव |
| क्रिया किसके अनुसार | कर्ता के | कर्म के | किसी के नहीं |
| क्रिया | सकर्मक/अकर्मक | केवल सकर्मक | केवल अकर्मक |
| कर्ता के साथ परसर्ग | ने / कुछ नहीं | से, के द्वारा | से |
| उदाहरण | राम पत्र लिखता है | राम से पत्र लिखा जाता है | राम से चला नहीं जाता |
वाच्य परिवर्तन
परीक्षा में प्रायः कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य बनाने को कहा जाता है। इसके चरण निश्चित हैं।
- कर्ता के साथ से या के द्वारा लगाइए।
- कर्म को कर्ता के स्थान पर रखिए और उसका परसर्ग हटा दीजिए।
- मुख्य क्रिया को भूतकालिक कृदंत में बदलिए।
- उसके साथ जाना क्रिया का उपयुक्त रूप जोड़िए।
- क्रिया का लिंग-वचन अब कर्म के अनुसार रखिए। काल नहीं बदलेगा।
चरण दर चरण
कर्तृवाच्य — माता जी ने रोटी बनाई।
कर्मवाच्य — माता जी के द्वारा रोटी बनाई गई।
कुछ और उदाहरण:
| कर्तृवाच्य | कर्मवाच्य |
|---|---|
| मैं पत्र लिखता हूँ। | मुझसे पत्र लिखा जाता है। |
| बच्चे कविता गाते हैं। | बच्चों से कविता गाई जाती है। |
| उसने पुस्तक पढ़ी। | उसके द्वारा पुस्तक पढ़ी गई। |
| पुलिस चोर को पकड़ेगी। | पुलिस के द्वारा चोर पकड़ा जाएगा। |
भाववाच्य बनाना
अकर्मक क्रिया के वाक्य को भाववाच्य में बदलते समय कर्ता के साथ से लगाइए और क्रिया को सदा पुल्लिंग एकवचन रखिए।
| कर्तृवाच्य | भाववाच्य |
|---|---|
| मैं चल नहीं सकता। | मुझसे चला नहीं जाता। |
| वह सो नहीं सकती। | उससे सोया नहीं जाता। |
| बच्चे दौड़ नहीं सकते। | बच्चों से दौड़ा नहीं जाता। |
अभ्यास
-
वाच्य पहचानने की एक ही कसौटी क्या है?
उत्तरयह देखिए कि क्रिया किसके लिंग-वचन के अनुसार बदल रही है। कर्ता के अनुसार हो तो कर्तृवाच्य, कर्म के अनुसार हो तो कर्मवाच्य, और किसी के अनुसार न बदले (सदा पुल्लिंग एकवचन रहे) तो भाववाच्य।
-
“राम आता है” का कर्मवाच्य क्यों नहीं बन सकता?
उत्तरक्योंकि “आना” अकर्मक क्रिया है और उसका कोई कर्म नहीं। कर्मवाच्य में कर्म को प्रधान बनाया जाता है, इसलिए वह केवल सकर्मक क्रियाओं का बनता है।
-
“माता जी ने रोटी बनाई।” — इसे कर्मवाच्य में बदलिए।
उत्तरमाता जी के द्वारा रोटी बनाई गई।
-
भाववाच्य में क्रिया सदा किस रूप में रहती है, और क्यों?
उत्तरसदा अन्य पुरुष, पुल्लिंग, एकवचन में — जैसे “जाता”। क्योंकि भाववाच्य में न कर्ता प्रधान होता है न कर्म, बल्कि क्रिया का भाव प्रधान होता है, इसलिए क्रिया किसी के अनुसार नहीं बदलती।
-
वाच्य बदलते समय सबसे आम भूल कौन-सी है?
उत्तरकाल बदल देना। वाच्य परिवर्तन में काल कभी नहीं बदलता — “लिखता है” का कर्मवाच्य “लिखा जाता है” रहेगा, “लिखा गया” नहीं।