मुख्य सामग्री पर जाएँ
Hindi vyakaran

शब्द विचार (Morphology)

उपसर्ग (Prefix)

मध्यम विस्तृत विवेचन अंतिम बदलाव
इस पृष्ठ में

हार का अर्थ है पराजय। उसके आगे प्र लगाइए तो प्रहार बनता है — आघात। आ लगाइए तो आहार — भोजन। सम लगाइए तो संहार — नाश। मूल शब्द एक ही रहा, पर आगे लगे छोटे-से अंश ने अर्थ पूरी तरह बदल दिया। इन्हीं शब्दांशों को उपसर्ग कहते हैं।

उदाहरण

  • प्र + हार = प्रहार
  • आ + हार = आहार
  • सम् + हार = संहार
  • वि + हार = विहार

उपसर्ग का कार्य

उपसर्ग तीन में से कोई एक काम करता है।

कार्यउदाहरणपरिवर्तन
अर्थ बदल देनागति → दुर्गतिशुभ से अशुभ
अर्थ में विशेषता लानाज्ञान → विज्ञानसामान्य से विशिष्ट
अर्थ का उल्टा कर देनामान → अपमानविपरीत अर्थ

उपसर्गों के प्रकार

हिंदी में उपसर्ग तीन स्रोतों से आए हैं।

1. संस्कृत के उपसर्ग

संस्कृत में बाईस उपसर्ग माने जाते हैं, जिनमें से प्रमुख अठारह यहाँ दिए जा रहे हैं। हिंदी के अधिकांश तत्सम शब्द इन्हीं से बने हैं।

उपसर्गअर्थउदाहरण
प्रआगे, अधिकप्रगति, प्रबल, प्रयोग
पराउल्टा, पीछेपराजय, पराक्रम, पराभव
अपबुरा, हीनअपमान, अपयश, अपशब्द
सम्पूर्ण, साथसंगम, संतोष, संस्कार
अनुपीछे, समानअनुकरण, अनुशासन, अनुवाद
अवनीचे, हीनअवनति, अवगुण, अवतार
निर्बिना, निषेधनिर्दोष, निर्जल, निर्भय
दुर्बुरा, कठिनदुर्गति, दुर्बल, दुराचार
विविशेष, भिन्नविज्ञान, विदेश, विशेष
आतक, सेआगमन, आजीवन, आहार
उपनिकट, गौणउपकार, उपवन, उपमंत्री
प्रतिविरुद्ध, हर एकप्रतिदिन, प्रतिकूल, प्रतिध्वनि
अधिऊपर, श्रेष्ठअध्यक्ष, अधिकार, अधिपति
अभिसामने, ओरअभिमान, अभियान, अभिनय
सुअच्छा, सरलसुगम, सुयश, सुपुत्र
निनीचे, भीतरनिबंध, निवास, निपात
उत्ऊपर, श्रेष्ठउन्नति, उत्कर्ष, उद्गम
परिचारों ओरपरिक्रमा, परिवार, परिश्रम

2. हिंदी के उपसर्ग

ये संस्कृत उपसर्गों के ही बदले हुए रूप हैं, जो तद्भव शब्दों के साथ चलते हैं।

उपसर्गअर्थउदाहरण
अ / अननिषेधअछूता, अनपढ़, अनजान
कुबुराकुपुत्र, कुचाल, कुरूप
बिनबिनाबिनब्याहा, बिनबोया
भरपूराभरपेट, भरपूर, भरसक
सुअच्छासुडौल, सुजान
औ / अवहीनऔगुन, औघड़

3. उर्दू-फ़ारसी के उपसर्ग

लंबे संपर्क के कारण ये हिंदी में पूरी तरह घुल-मिल गए हैं।

उपसर्गअर्थउदाहरण
बेबिनाबेकार, बेईमान, बेरहम
लाबिनालाइलाज, लापरवाह, लाजवाब
बदबुराबदनाम, बदबू, बदकिस्मत
हरप्रत्येकहररोज़, हरदम, हरएक
गैरभिन्नगैरहाज़िर, गैरकानूनी
सरमुख्यसरपंच, सरताज
हमसाथ, समानहमसफ़र, हमउम्र, हमदर्द
नानिषेधनापसंद, नासमझ, नाराज़

उपसर्ग लगने पर होने वाले ध्वनि परिवर्तन

संस्कृत उपसर्ग जुड़ते समय प्रायः संधि होती है, इसलिए जुड़ा हुआ रूप मूल से भिन्न दिखता है।

उपसर्ग + शब्दसंधि के बाद
सम् + तोषसंतोष
उत् + नतिउन्नति
निर् + झरनिर्झर
अधि + अक्षअध्यक्ष
प्रति + एकप्रत्येक

इसी कारण उपसर्ग पहचानने के लिए संधि-विच्छेद का ज्ञान सहायक होता है।

अभ्यास

उत्तर देखने से पहले स्वयं सोचें।

  1. उपसर्ग की परिभाषा दीजिए और बताइए कि वह अकेला क्यों नहीं चल सकता।

    उत्तरजो शब्दांश किसी शब्द के आगे लगकर उसके अर्थ में परिवर्तन या विशेषता लाए, उसे उपसर्ग कहते हैं। उसका अपना स्वतंत्र अर्थ नहीं होता — “प्र” या “वि” अपने आप में कोई शब्द नहीं, वे तभी अर्थ देते हैं जब किसी शब्द से जुड़ें।

  2. “हार” शब्द में चार भिन्न उपसर्ग लगाकर चार नए शब्द बनाइए।

    उत्तरप्रहार (प्र), आहार (आ), संहार (सम्), विहार (वि)।

  3. “अनुपस्थित” शब्द का उपसर्ग सहित विच्छेद कीजिए।

    उत्तरअन् + उप + स्थित। इसमें दो उपसर्ग लगे हैं।

  4. “राजपुत्र” में “राज” उपसर्ग क्यों नहीं है?

    उत्तरक्योंकि “राज” एक स्वतंत्र शब्द है जो अकेला प्रयुक्त हो सकता है। उपसर्ग स्वतंत्र नहीं होता, इसलिए “राजपुत्र” समास है, उपसर्ग-रचना नहीं।

  5. “बेकार”, “दुर्गति” और “अनपढ़” में प्रयुक्त उपसर्गों के स्रोत बताइए।

    उत्तरबेकार — बे (उर्दू-फ़ारसी), दुर्गति — दुर् (संस्कृत), अनपढ़ — अन (हिंदी)।

सम्बंधित विषय

Type the name in Devanagari or Roman — e.g. संज्ञा या sangya

हिंदी और रोमन — दोनों में खोजा जा सकता है।