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रचना (Composition)

निबंध लेखन (Essay Writing)

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किसी विषय पर क्रमबद्ध, सुगठित और विचारपूर्ण गद्य रचना — जिसकी नींव रूपरेखा है।

मध्यम विस्तृत विवेचन अंतिम बदलाव
इस पृष्ठ में

निबंध शब्द का अर्थ है — भली भाँति बँधा हुआ। यही इसकी कसौटी भी है: विषय पर जो कुछ लिखा जाए, वह एक सूत्र में बँधा दिखाई दे।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने निबंध को गद्य की कसौटी कहा है, क्योंकि इसमें लेखक की भाषा, विचार और संगठन — तीनों एक साथ परखे जाते हैं।

निबंध के तीन अंग

अंगकामअनुमानित विस्तार
प्रस्तावनाविषय का परिचय और पाठक की रुचि जगानालगभग छठा भाग
विषय-विस्तारमुख्य विचार, तर्क, उदाहरण, पक्ष-विपक्षलगभग दो-तिहाई
उपसंहारनिष्कर्ष और अंतिम संदेशलगभग छठा भाग

निबंध के प्रकार

प्रकारविषयउदाहरण
वर्णनात्मकवस्तु, स्थान या दृश्यहिमालय, मेरा विद्यालय
विवरणात्मकघटना या यात्राएक यात्रा का अनुभव
विचारात्मकविचार या समस्यापर्यावरण संरक्षण, शिक्षा का उद्देश्य
भावात्मकभाव और अनुभूतिवर्षा ऋतु, माँ
आत्मकथात्मककिसी वस्तु की आत्मकथाएक नदी की आत्मकथा

विचारात्मक निबंध सबसे कठिन माने जाते हैं, क्योंकि उनमें केवल वर्णन नहीं, तर्क का क्रम भी सिद्ध करना पड़ता है।

रूपरेखा — निबंध की नींव

लिखने से पहले पाँच से सात बिंदुओं की रूपरेखा बना लेना आधा निबंध पूरा कर देता है। इससे दो लाभ होते हैं — विषय से भटकाव नहीं होता, और विस्तार संतुलित रहता है।

नमूना रूपरेखा — पर्यावरण संरक्षण

  1. प्रस्तावना — पर्यावरण का अर्थ और मनुष्य से उसका संबंध
  2. बिगड़ते पर्यावरण के रूप — वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण
  3. कारण — औद्योगीकरण, वन-कटाव, बढ़ती जनसंख्या
  4. परिणाम — ऋतु-चक्र में परिवर्तन, रोग, जल-संकट
  5. समाधान — वृक्षारोपण, जल-संचय, वैकल्पिक ऊर्जा
  6. नागरिक का दायित्व
  7. उपसंहार — संरक्षण एक विकल्प नहीं, आवश्यकता है

भाषा और शैली

नियमकारण
एक अनुच्छेद में एक ही मुख्य विचारपाठक को क्रम पकड़ने में सुविधा
वाक्य छोटे और स्पष्टलंबे वाक्य अर्थ को धुँधला करते हैं
सूक्ति, दोहा या आँकड़ा यथास्थानकथन को प्रमाण मिलता है
पुनरुक्ति से बचावपर्यायवाची शब्दों का प्रयोग कीजिए
अंत में निष्कर्ष, नया तर्क नहींउपसंहार बहस खोलने का स्थान नहीं है

एक प्रस्तावना का नमूना

नमूना प्रस्तावना

मनुष्य ने जितनी तेज़ी से प्रकृति पर विजय पाई है, उतनी ही तेज़ी से उसने अपना आधार भी काटा है। जिस वायु से वह साँस लेता है और जिस जल से जीवन पाता है, वही आज संकट में है। पर्यावरण संरक्षण इसलिए कोई आदर्शवादी कल्पना नहीं, आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा सीधा उत्तरदायित्व है।

ध्यान दीजिए कि यह प्रस्तावना विषय की समस्या रखती है, समाधान नहीं देती। समाधान विषय-विस्तार में आएगा।

बचने योग्य दोष

दोषउदाहरण
विषयांतरविज्ञान के लाभ लिखते हुए विद्यालय की दिनचर्या बताने लगना
असंतुलनपाँच पृष्ठ में तीन पृष्ठ की भूमिका
अत्यधिक अलंकृत भाषाविचारात्मक निबंध में काव्यात्मक उड़ान
अनुच्छेद-विहीन लेखनपूरा निबंध एक ही खंड में
अधूरा उपसंहारनिबंध का बीच में ही समाप्त हो जाना

अभ्यास

उत्तर देखने से पहले स्वयं सोचें।

  1. निबंध के तीन अंग कौन-से हैं?

    उत्तरप्रस्तावना, विषय-विस्तार और उपसंहार।

  2. निबंध लिखने से पहले रूपरेखा बनाने के क्या लाभ हैं?

    उत्तररूपरेखा से विषय से भटकाव नहीं होता और विस्तार संतुलित रहता है — कोई बिंदु अधूरा नहीं छूटता और कोई अनावश्यक रूप से लंबा नहीं होता।

  3. “एक नदी की आत्मकथा” किस प्रकार का निबंध है?

    उत्तरआत्मकथात्मक निबंध, जिसमें किसी वस्तु को वक्ता बनाकर उसकी दृष्टि से विषय प्रस्तुत किया जाता है।

  4. प्रस्तावना लिखते समय सबसे आम भूल कौन-सी होती है?

    उत्तरप्रस्तावना में ही पूरा विषय कह देना, जिससे शेष निबंध उसी की पुनरावृत्ति बनकर रह जाता है।

  5. उपसंहार में नया तर्क क्यों नहीं देना चाहिए?

    उत्तरक्योंकि उपसंहार का काम पूरे विवेचन का निष्कर्ष देना है। वहाँ नया तर्क उठाने से निबंध पूर्ण होने के बजाय अधूरा लगने लगता है।

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